गुप्त रोग

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गुप्त रोग:
इसके अंतर्गत उम्र के हिसाब से अलग अलग प्रकार के बिमारी होती है। ज्यादातर लोग नीम हकीम के चक्कर मे पड़कर या ज्यादा आकर्षण प्रचार के चक्कर मे पड़ कर इलाज कराते है लेकिन फायदा कुछ भी नहीं मिल पाता है। शीघ्रपतन, वीर्य का पतलापन, शुक्राणु की कमी, नपुंसकता रोग का इलाज सही तरीके से करने के लिए “उत्तम रसायन” और बाजीकरण औषधियों का सेवन करना जरुरी है। जिन औषधियों के सेवन से हर मनुष्य असमय में मृत्यु और बुढापे से बचा रहे और जिन्दगी में भरपुर आनन्द हमेशा के लिए उठा सकें। हमारे पुर्वजों के द्वारा कहा गया है। मनुष्य और घोड़ा जवानी के मामले में कभी बूढ़ा नही होता है। बशर्ते उसे सही तरह से उम्र के अनुसार ‘उत्तम रसायन’ और बाजीकरण औषधि दी जा सकें।

आजकल भौतिक यूग मे अधिकांशतः लोग को ‘शुक्र तारल्य’ रोग हो जाता है। जिसे हम आज की भाषा में वीर्य का पतलापन कहते है। जिसके परिणाम स्वरुप तनिक भी रुकावट नहीं हो पाती तथा रोगी कब्ज, जीर्ण, अतिसार, मन्दाग्नि, काम में मन नही लगना, सिर चकराना, चक्कर आना, कमजोरी, नेत्रो के इर्द गिर्द काले दाग हो जाना, इन्द्रि ढिलापन हो जाता है। जिससे रोगी को कभी कभी नपुंसकता हो जाता है।
हमारे पूर्व ऋषि मूनियों (जैसे – सुश्रुत, चरक, चब्य) ने सिद्द कर दिया है कि आदमी को हमेशा सही तरीके से हर काम को करने के लिए सेक्स मे पूर्ण सतुष्टि मिलना अति आवश्यक है। जिसे हर व्यक्ति खुले विचार से अपने उम्र के अनुसार सारा कार्य समयानुसार सही तरीके से कर सकें।